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गुरुवार, 11 मार्च 2010
छू कर मेरे मन को
.......बहुत सी मुरादें ऐसी होती है जो हमारे अंदर रहती है पर हमें पता नही देती । वे शोर नही करती, बाहर नही दिखती, वे अपने होने का पता नही देती । हम उनके बारे में नही जानते इसलिए उनके पूरी होने की दुआ भी नही करते ।
........लोग जानकारियों का खजाना है ।
........आदमी अपने आप में बहुत से सवालों का जवाब है ।
........अपना महत्तव बनाये रखने के लिये चुप रहना जरुरी होता है ।
........खुद को सन्तुष्ट करना मुश्किल है।
शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
कुछ मैं कहूं मुझसे ...........
कंकड़ उछालना
प्रकृति है उनकी
मैं देती हूं उससे
अपनी नींवों को मजबूती !
इसी डगर पड़ सकता है
कभी लौट आना
चलते हुये भी
कांटे हटाते जाना !
अजाने ही सांप को
दूध पिलाते हैं
फिर भी संभले
वही सयाने है!
शब्दों से तो
कम ही काम लेना
मन ही में गिनकर
गांठ बांध लेना !
तुम ही तो कहते थे
ठीक नही अविश्वास इतना
अब कहते हो
मौका देखकर झट रंग बदलना!
.................किरण राजपुरोहित नितिला
छू कर मेरे मन को
शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010
छू कर मेरे मन को
.............. पक्षियों का कलरव शोर नही कहलाता क्योंकि जिस रव में अपनों से मिलने की उत्कंठा हो ,अपनों को सम्हालने का भाव हो सहयोग एवं प्रेम की उत्कठ पुकार हो वो शोर कैसे होगा।
...........पुस्तकें वे तितलियां है जो ज्ञान के पराकणें को एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क तक ले जाती है।
............इस दुनिया में कुत्ता ही एक मात्र प्राणी है जो हमें स्वयं से अधिक प्यार करता है।
...........पुस्तकें वे तितलियां है जो ज्ञान के पराकणें को एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क तक ले जाती है।
............इस दुनिया में कुत्ता ही एक मात्र प्राणी है जो हमें स्वयं से अधिक प्यार करता है।
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