बुधवार, 3 फ़रवरी 2010

ऐसा भी होगा..............


ऐसा भी होगा..............
जिदंगी इतनी आसान
न होगी
हर मोड़ पर
 कसौटियां होगी ,
उम्मीद से पहले
सोचना होगा
रिश्तों में कुछ
 खामियां होगी ,
बहुत मुश्किल है
सब को खुश रखना
कहीं न कहीं
नाराजगियंा होगी,
मुस्कुराहट
हरदम साथ न होगी
कभी साथी
 सिसकियां  होगी,
किनारा ही न
मिलेगा सदा
मझधार में किश्तिया  होगी

..........किरण राजपुरोहित नितिला

5 टिप्‍पणियां:

RaniVishal ने कहा…

Sunadar rachana...Badhai!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

Gappe bazi ने कहा…

jindagi ki kadabi haqikat likh dali.kahi na kahi kuch na kuch kami jarur rah jati hai.sabko khush rakh pana sambhb nahi.

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया भाव!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"किनारा ही न
मिलेगा सदा
मझधार में किश्तिया होगी"

धरातल से जुड़ी,
सत्यता का बोध कराती,
इस रचना के लिए आपको बधाई!

हृदय पुष्प ने कहा…

"किनारा ही न
मिलेगा सदा
मझधार में किश्तिया होगी"
जीवन सत्य.