गुरुवार, 4 मार्च 2010

नन्ही परी

नन्ही परी
देख तेरे आंगन आई नन्ही परी              
हर तरफ से देखो
वह प्रेम से भरी,
सुनकर उसकी कोयल सी आवाज
चला आये तू उस आगाज़
जहां वह खेल रही
देख तेरे अँागन आई नन्ही परी,
वह ले जाती तुझे    
 किसी और लोक में
जब होती वह
तेरी कोख में
तेज आवाज सुन
वह दुनिया से डरी
देख तेरे आँगन
आई नन्ही परी,
रौनक वह आँचल
में लेकर आई,
पास है उसके
चंचलता की झांई
जिसके छूकर
तू हो गई हरी
देख तेरे आँगन
आई नन्ही परी ..... रुचि राजपुरोहित ’तितिक्षा                

6 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

प्यारी बच्ची..सुन्दर रचना!!

M VERMA ने कहा…

बहुत सुन्दर दोनो कविता और बच्ची

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

नन्ही परी और रचना दोनों सुन्दर हैं ....

दीपक 'मशाल' ने कहा…

koi shaq nahin bitiya aur uske aagman ki khushi me buni gayee kavita har kon se khoobsoorat hain.. chahe manveeya drishtikon ho, maa ka vatsalya, ya sarkari..

RaniVishal ने कहा…

Jitani khubsurat ye pyari nanhi pari hai utani hi sundar aapki rachana!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

परी के घर परी न आए तो विस्मय हो...परी का आना तो सहज है ..