शनिवार, 3 अक्तूबर 2009



छू कर मेरे मन को.....
-तमाम विकृितयों और विसंगितयों के बावजूद हमारा गणतंत्र हमारी जनता अैर हमारे सामािजक , मानवीय सांस्कृितक मूल्यों पर टिका है।
-एक शिक्षक की गेंडें की खाल होनी चािहये । सम्मान के फूल और अपमान के तीरों का प्रभाव शिक्षक की खाल पर नहीं होना चािहये।
-प्रेम एक साथ एक को अिधकार औेर दूसरे को समर्पण किस प्रकार दे देता है।
-जो शिक्त अपने में नही होती उसे दूसरे में देख कर मनुष्य केा आश्चर्य हेाता ही है। आश्चर्य से मोह पैदा होता है।
-सभी लोग करारों के खुद को अचछे लगने वाले अर्थ करके दुनिया केा खुद केा अैार भगवान केा धेाखा देते है।
-प्राचीन काल में विद्यार्थी ब्रहमचारी ही कहलाता था।


1 टिप्पणी:

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

आशा कोमल पत्र पर, तुहिन बिंदु विश्वास.
कहें 'सलिल' जितना मिला, जीवन कर तू हास..