सोमवार, 5 अक्तूबर 2009



छू कर मेरे मन को.....
-जब कोई प्िरतभाशाली हस्ती इस दुिनया में आती है तो उसे इस लक्षण से पहचाना जा सकता है कि   सभी मूर्ख लोग उसके विरुद्ध उठ खड़े होते है।
-इंसान अभाव में जितना कष्ट नही पाता जितना फिजूलखर्ची से।
-शीघ्रता करना सफलता के मौके को खोना ।
-ताजमहल समय के गाल पर थमा हुआ आंसू है।- रिवन्द्रनाथ टैगोर



1 टिप्पणी:

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

कोमल है निर्बल इसे, समझ न करना भूल.
'सलिल' सत्य की कली में, साहस के हैं शूल..