गुरुवार, 10 सितंबर 2009

लुकािछपी!! लुकािछपी!!!

1 टिप्पणी:

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा…

दिखें-छिपें रवि-किरण ज्यों, रहीं धरा को आँक.
कोई नवोढा ज्यों रही, अतिथि 'सलिल' को झाँक..